सीखें · उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान
उत्तर प्रदेश इतिहास समयरेखा
छठी शताब्दी ई.पू. के महाजनपदों से लेकर प्रयागराज और अयोध्या के नए नामों तक, उत्तर प्रदेश क्षेत्र के इतिहास की प्रमुख घटनाएँ — काल के अनुसार छाँटिए और किसी घटना को खोलकर पढ़िए।
समयरेखा
वे घटनाएँ जो आज के उत्तर प्रदेश की धरती पर घटीं या जिन्होंने इसे आकार दिया। काल के अनुसार छाँटिए और किसी घटना पर टैप करके संक्षिप्त विवरण पढ़िए। प्राचीन काल की 'लगभग' वाली तिथियाँ अनुमानित हैं; बुद्ध से जुड़ी तिथियाँ पारंपरिक हैं।
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छठी शताब्दी ई.पू.
उत्तर प्रदेश क्षेत्र के महाजनपद
सोलह महाजनपदों में से कई आज के उत्तर प्रदेश में थे, जैसे काशी (वाराणसी), कोसल (श्रावस्ती), वत्स (कौशांबी), शूरसेन (मथुरा) और मल्ल (कुशीनारा)।
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लगभग 528 ई.पू.
सारनाथ में बुद्ध का प्रथम उपदेश
बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने वाराणसी के निकट सारनाथ (मृगदाव) में अपना पहला उपदेश दिया, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहते हैं। यह वर्ष पारंपरिक तिथि है।
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लगभग 483 ई.पू.
कुशीनगर में महापरिनिर्वाण
मल्लों के क्षेत्र कुशीनारा (कुशीनगर) में 80 वर्ष की आयु में बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ। यह वर्ष पारंपरिक तिथि है।
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तीसरी शताब्दी ई.पू.
सारनाथ का अशोक सिंह-शीर्ष
मौर्य सम्राट अशोक ने सारनाथ में एक स्तंभ स्थापित करवाया, जिसके शीर्ष पर चार सिंह हैं। इसी सिंह-शीर्ष को 26 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया।
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लगभग पहली–तीसरी शताब्दी ई.
मथुरा कला शैली
कुषाणों के शासनकाल में मथुरा मूर्तिकला का बड़ा केंद्र बना। यहाँ के शिल्पियों ने स्थानीय चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर से बौद्ध, जैन और हिंदू मूर्तियाँ बनाईं।
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लगभग चौथी शताब्दी ई.
समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति
समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन प्रयागराज (इलाहाबाद) के अशोक स्तंभ पर अंकित प्रयाग प्रशस्ति में है, जिसकी रचना उसके दरबारी कवि हरिषेण ने की थी।
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लगभग 500 ई.
देवगढ़ का गुप्तकालीन मंदिर
देवगढ़ (ललितपुर ज़िला) का दशावतार मंदिर, जो विष्णु को समर्पित है, उत्तर भारत के सबसे प्राचीन विद्यमान पाषाण मंदिरों में से एक है; इसका निर्माण गुप्त काल में हुआ।
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606 ई.
हर्षवर्धन और कन्नौज
हर्षवर्धन 606 ई. में सिंहासन पर बैठा और उसने कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया। चीनी यात्री ह्वेनसांग उसके दरबार में आया था।
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लगभग आठवीं–दसवीं शताब्दी ई.
कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष
उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित नगर कन्नौज पर अधिकार के लिए गुर्जर-प्रतिहारों, पालों और राष्ट्रकूटों में लंबा संघर्ष चला। गुर्जर-प्रतिहारों ने लंबे समय तक कन्नौज से शासन किया।
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1018
महमूद ग़ज़नवी का मथुरा और कन्नौज पर आक्रमण
भारत पर अपने अनेक आक्रमणों में से एक में महमूद ग़ज़नवी ने मंदिरों के नगर मथुरा को लूटा और कन्नौज पर हमला किया।
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1194
चंदावर का युद्ध
मुहम्मद ग़ोरी ने चंदावर के युद्ध में कन्नौज के गहड़वाल शासक जयचंद को हराया, जिससे गंगा के मैदान ग़ोरी की सेनाओं के लिए खुल गए।
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1394
जौनपुर की शर्की सल्तनत
1394 में तुग़लक़ सरदार मलिक सरवर को मलिक-उस-शर्क़ की उपाधि के साथ जौनपुर का सूबेदार बनाया गया; वह शीघ्र ही स्वतंत्र रूप से शासन करने लगा और उसने शर्की वंश की नींव रखी। जौनपुर शिक्षा और स्थापत्य का केंद्र बना और 'शिराज़-ए-हिंद' कहलाया; अटाला मस्जिद इसकी सबसे प्रसिद्ध इमारत है।
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1540
कन्नौज का युद्ध
शेरशाह सूरी ने कन्नौज (बिलग्राम) के युद्ध में हुमायूँ को हराया, जिसके बाद हुमायूँ को भारत छोड़ना पड़ा।
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1545
कालिंजर में शेरशाह की मृत्यु
वर्तमान बाँदा ज़िले के कालिंजर दुर्ग की घेराबंदी के दौरान बारूद के विस्फोट से शेरशाह सूरी की मृत्यु हो गई।
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लगभग 1571
अकबर द्वारा फ़तेहपुर सीकरी की स्थापना
अकबर ने सूफ़ी संत शेख़ सलीम चिश्ती के सम्मान में आगरा के निकट फ़तेहपुर सीकरी में नई राजधानी बसाई। यहाँ का बुलंद दरवाज़ा उसकी गुजरात विजय की स्मृति में बना।
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1632–1653
ताजमहल का निर्माण
शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल के मक़बरे के रूप में आगरा में यमुना के तट पर ताजमहल बनवाया।
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1722
अवध के नवाब
सआदत ख़ाँ (बुरहान-उल-मुल्क) को अवध का सूबेदार नियुक्त किया गया; इसी से अवध के नवाबों का वंश आरंभ हुआ।
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1765
इलाहाबाद की संधि
बक्सर के युद्ध (1764) के बाद रॉबर्ट क्लाइव ने इलाहाबाद में संधियाँ कीं: शाह आलम द्वितीय से ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली, और अवध नवाब शुजाउद्दौला को लौटा दिया गया।
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1775
लखनऊ बना अवध की राजधानी
नवाब आसफ़उद्दौला ने अवध की राजधानी फ़ैज़ाबाद से लखनऊ स्थानांतरित की; बाद में उसने वहाँ बड़ा इमामबाड़ा बनवाया।
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1856
अवध का विलय
लॉर्ड डलहौज़ी ने कुशासन का आरोप लगाकर अवध को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिया। नवाब वाजिद अली शाह को गद्दी से हटाकर कलकत्ता भेज दिया गया।
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10 मई 1857
मेरठ से विद्रोह की शुरुआत
मेरठ के सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया, जेल में बंद अपने साथियों को छुड़ाया और दिल्ली की ओर कूच किया; यहीं से 1857 का विद्रोह शुरू हुआ।
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1857
कानपुर में नाना साहब
पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया; तात्या टोपे उनके सेनानायकों में से थे।
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1857
लखनऊ में बेगम हज़रत महल
बेगम हज़रत महल ने लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस क़द्र को नवाब घोषित किया; ब्रिटिश रेज़िडेंसी महीनों तक घिरी रही।
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1857–58
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई
रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी में अंग्रेज़ों का प्रतिरोध किया; अंग्रेज़ों ने व्यपगत के सिद्धांत (हड़प नीति) के तहत झाँसी राज्य को अपने अधिकार में ले लिया था।
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1 नवंबर 1858
इलाहाबाद में महारानी की घोषणा
लॉर्ड कैनिंग ने इलाहाबाद में महारानी विक्टोरिया की घोषणा पढ़ी, जिसमें बताया गया कि भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन ने अपने हाथ में ले लिया है।
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1866
आगरा में उच्च न्यायालय की स्थापना
पश्चिमोत्तर प्रांत का उच्च न्यायालय 1866 में आगरा में स्थापित हुआ और 1869 में इलाहाबाद स्थानांतरित किया गया — यही आज का इलाहाबाद उच्च न्यायालय है।
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1875
मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज, अलीगढ़
सर सैयद अहमद ख़ाँ ने अलीगढ़ में एक विद्यालय खोला, जो 1877 में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज और 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना।
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1902
संयुक्त प्रांत आगरा और अवध
1877 से एक साथ प्रशासित 'पश्चिमोत्तर प्रांत और अवध' का नाम बदलकर 'संयुक्त प्रांत आगरा और अवध' रखा गया।
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1916
लखनऊ समझौता
लखनऊ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने संयुक्त संवैधानिक माँगों पर सहमति बनाई; इसी अधिवेशन में कांग्रेस के नरमपंथी और गरमपंथी फिर एक हुए।
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1920
अवध किसान सभा
बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में अवध के किसान भारी लगान और बेगार के विरुद्ध संगठित हुए; 1920 में अवध किसान सभा बनी, जिसके नेताओं में जवाहरलाल नेहरू भी थे।
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4 फ़रवरी 1922
चौरी चौरा
गोरखपुर ज़िले के चौरी चौरा में भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
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9 अगस्त 1925
काकोरी ट्रेन एक्शन (काकोरी कांड)
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने लखनऊ के निकट काकोरी में ट्रेन से सरकारी ख़ज़ाना ले लिया। बाद में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को फाँसी दी गई।
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27 फ़रवरी 1931
अल्फ़्रेड पार्क में चंद्रशेखर आज़ाद
चंद्रशेखर आज़ाद इलाहाबाद के अल्फ़्रेड पार्क में पुलिस से लड़ते हुए शहीद हुए; उन्होंने पकड़े जाने के बजाय मृत्यु चुनी। अब यह पार्क उन्हीं के नाम पर है।
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अगस्त 1942
बलिया में भारत छोड़ो आंदोलन
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया में कुछ समय के लिए समानांतर सरकार बनी।
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15 अगस्त 1947
भारत की पहली महिला राज्यपाल
स्वतंत्रता दिवस पर सरोजिनी नायडू संयुक्त प्रांत की राज्यपाल बनीं — वे भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं।
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24 जनवरी 1950
संयुक्त प्रांत बना उत्तर प्रदेश
संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश रखा गया; 24 जनवरी अब 'उत्तर प्रदेश दिवस' के रूप में मनाया जाता है। प्रांतीय सरकार के प्रमुख गोविंद बल्लभ पंत 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने पर उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने।
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2 अक्टूबर 1963
देश की पहली महिला मुख्यमंत्री
सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं — वे भारत के किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं।
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1983
ताजमहल और आगरा क़िला विश्व धरोहर सूची में
यूनेस्को ने ताजमहल और आगरा क़िले को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया; 1986 में फ़तेहपुर सीकरी को भी यह दर्जा मिला।
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9 नवंबर 2000
उत्तर प्रदेश से उत्तरांचल का गठन
उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग के 13 ज़िलों को मिलाकर नया राज्य उत्तरांचल बना, जिसका नाम 2007 में उत्तराखंड किया गया।
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2018
इलाहाबाद बना प्रयागराज, फ़ैज़ाबाद बना अयोध्या
इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और फ़ैज़ाबाद ज़िले का नाम बदलकर अयोध्या किया गया।