सीखें · शिक्षक परीक्षाएँ (CTET, सुपर टेट, TGT/PGT)
पर्यावरण अध्ययन और विज्ञान के चित्र
पौधे, फूल और जल चक्र के भागों पर टैप करें और देखें कि हर भाग क्या करता है — फिर क्विज़ से ख़ुद को परखें।
पौधे के किसी भाग पर या सूची में किसी नाम पर टैप करें और देखें कि वह क्या करता है।
-
पौधे को मिट्टी में मज़बूती से जकड़े रखती है और मिट्टी से जल व खनिज अवशोषित करती है। कुछ जड़ें भोजन भी संचित करती हैं, जैसे गाजर और मूली।
-
शाखाओं, पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देता है। यह जड़ों से जल और खनिज पत्तियों तक ऊपर ले जाता है, और पत्तियों में बना भोजन दूसरे भागों तक पहुँचाता है।
-
प्रकाश संश्लेषण द्वारा पौधे के लिए भोजन बनाती है — सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल की सहायता से; हरा वर्णक क्लोरोफ़िल प्रकाश ग्रहण करता है। पत्ती के छोटे छिद्रों (रंध्रों) से जलवाष्प बाहर निकलती है (वाष्पोत्सर्जन)।
-
पौधे का जनन अंग। निषेचन के बाद इससे फल बनता है, जिसमें बीज होते हैं।
-
बिना खिला फूल। खिलने पर यही फूल बनती है।
पुंकेसर (परागकोश + तंतु) फूल का नर भाग है; स्त्रीकेसर (वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय) मादा भाग है।
-
फूल के आधार पर छोटे, हरे, पत्ती जैसे भाग। जब फूल कली होता है, तब ये उसकी रक्षा करते हैं।
-
प्रायः चटकीले रंग की होती हैं। पंखुड़ियाँ कीटों को आकर्षित करती हैं, जो परागकण एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाते हैं।
-
पुंकेसर का ऊपरी भाग। इसमें परागकण बनते हैं, जिनमें नर युग्मक होते हैं।
-
पुंकेसर का पतला डंठल, जो परागकोश को ऊपर थामे रखता है।
-
स्त्रीकेसर का चिपचिपा ऊपरी सिरा। परागण के समय परागकण यहीं गिरकर चिपकते हैं।
-
स्त्रीकेसर का नली जैसा भाग, जो वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ता है।
-
स्त्रीकेसर का फूला हुआ आधार। इसमें बीजांड होते हैं; निषेचन के बाद अंडाशय फल बन जाता है और बीजांड बीज बन जाते हैं।
जल समुद्र, वायु और स्थल के बीच लगातार घूमता रहता है। हर तीर या बादल पर टैप करके इसे समझें।
-
सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदियों और झीलों का जल जलवाष्प में बदलकर वायु में ऊपर उठता है।
-
पौधे अपनी पत्तियों के छोटे छिद्रों (रंध्रों) से जलवाष्प बाहर छोड़ते हैं, जिससे वायु में और जलवाष्प पहुँचती है।
-
ऊँचाई पर वायु ठंडी होती है। वहाँ जलवाष्प ठंडी होकर जल की छोटी-छोटी बूँदों में बदल जाती है, जो मिलकर बादल बनाती हैं।
-
जब बूँदें आपस में मिलकर भारी हो जाती हैं, तो जल वर्षा, हिम या ओलों के रूप में वापस धरती पर गिरता है।
-
वर्षा का जल ज़मीन पर बहकर नालों और नदियों में पहुँचता है और अंत में फिर समुद्र में चला जाता है।
-
वर्षा का कुछ जल मिट्टी में रिसकर ज़मीन के नीचे भूजल के रूप में जमा होता है, जिसे हम कुओं और हैंडपंपों से निकालते हैं।