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संधि और समास विच्छेदक

कोई शब्द चुनिए, उसका संधि-विच्छेद या समास-विग्रह और उसके पीछे का नियम देखिए, फिर खुद को परखिए।

दो वर्णों (ध्वनियों) के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि वाले शब्द को फिर से उसके मूल भागों में अलग करना संधि-विच्छेद है। कोई शब्द चुनिए और उसका विच्छेद व नियम देखिए; अभ्यास मोड में पहले खुद विच्छेद सोचिए, फिर उत्तर खोलिए।

विद्यालय = विद्या + आलय

दीर्घ स्वर संधि दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

हिमालय = हिम + आलय

दीर्घ स्वर संधि दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

अ + आ = आ। 'हिमा + लय' लिखना आम गलती है।

गिरीश = गिरि + ईश

दीर्घ स्वर संधि दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

रवींद्र = रवि + इंद्र

दीर्घ स्वर संधि दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

भानूदय = भानु + उदय

दीर्घ स्वर संधि दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

वधूत्सव = वधू + उत्सव

दीर्घ स्वर संधि दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

महेश = महा + ईश

गुण संधि अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।

नरेंद्र = नर + इंद्र

गुण संधि अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।

सूर्योदय = सूर्य + उदय

गुण संधि अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।

महोत्सव = महा + उत्सव

गुण संधि अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।

महर्षि = महा + ऋषि

गुण संधि अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।

आ + ऋ = अर्। यह र् रेफ के रूप में 'षि' के ऊपर लगता है, इसलिए कई विद्यार्थी इसे गुण संधि नहीं पहचान पाते।

देवर्षि = देव + ऋषि

गुण संधि अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।

सदैव = सदा + एव

वृद्धि संधि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।

एकैक = एक + एक

वृद्धि संधि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।

मतैक्य = मत + ऐक्य

वृद्धि संधि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।

महैश्वर्य = महा + ऐश्वर्य

वृद्धि संधि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।

जलौघ = जल + ओघ

वृद्धि संधि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।

परमौषध = परम + औषध

वृद्धि संधि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।

इत्यादि = इति + आदि

यण संधि इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।

यद्यपि = यदि + अपि

यण संधि इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।

प्रत्येक = प्रति + एक

यण संधि इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।

स्वागत = सु + आगत

यण संधि इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।

उ + आ असमान स्वर हैं, इसलिए उ → व् (यण)। इसे दीर्घ संधि न समझें।

अन्वेषण = अनु + एषण

यण संधि इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।

पित्राज्ञा = पितृ + आज्ञा

यण संधि इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।

ऋ + असमान स्वर में ऋ → र्, इसलिए पितृ + आज्ञा → पित् + र् + आज्ञा = पित्राज्ञा।

नयन = ने + अन

अयादि संधि ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।

देखने में साधारण शब्द लगता है, पर ए + अ → अय् होकर न् + अय् + अन = नयन बनता है।

गायक = गै + अक

अयादि संधि ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।

पवन = पो + अन

अयादि संधि ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।

पवित्र = पो + इत्र

अयादि संधि ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।

ओ → अव्, फिर व् + इ = वि: प् + अव् + इत्र = पवित्र।

पावक = पौ + अक

अयादि संधि ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।

नाविक = नौ + इक

अयादि संधि ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।

जगदीश = जगत् + ईश

व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।

दिग्गज = दिक् + गज

व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।

जगन्नाथ = जगत् + नाथ

व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।

सज्जन = सत् + जन

व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।

उल्लास = उत् + लास

व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।

संतोष = सम् + तोष

व्यंजन संधि व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।

म् के बाद त आया, इसलिए म् अनुस्वार (ं) बन गया। 'सन्तोष' वर्तनी भी सही है।

निश्चल = निः + चल

विसर्ग संधि विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।

मनोबल = मनः + बल

विसर्ग संधि विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।

अः + घोष व्यंजन ब = ओ। यह विसर्ग संधि है, गुण नहीं; 'मन + ओबल' जैसा कोई विच्छेद नहीं होता।

दुर्जन = दुः + जन

विसर्ग संधि विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।

नमस्ते = नमः + ते

विसर्ग संधि विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।

निष्फल = निः + फल

विसर्ग संधि विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।

नीरस = निः + रस

विसर्ग संधि विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।

ः + र में विसर्ग का लोप होता है और इ दीर्घ होकर ई बन जाता है। 'नि + रस' लिखना गलत है।

नियम
दीर्घ स्वर संधि
दो सवर्ण (एक जैसे) स्वर, चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ, मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं: अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।
गुण संधि
अ/आ के बाद इ/ई आए तो ए, उ/ऊ आए तो ओ और ऋ आए तो अर् बनता है: अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्।
वृद्धि संधि
अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ और ओ/औ आए तो औ बनता है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ।
यण संधि
इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान (भिन्न) स्वर आए तो वे अर्धस्वर में बदल जाते हैं: इ/ई + असमान स्वर = य्; उ/ऊ + असमान स्वर = व्; ऋ + असमान स्वर = र्।
अयादि संधि
ए, ऐ, ओ या औ के बाद कोई भी स्वर आए तो: ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव्।
व्यंजन संधि
व्यंजन का स्वर या दूसरे व्यंजन से मेल होने पर व्यंजन में परिवर्तन होता है। मुख्य नियम: वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) + स्वर, किसी वर्ग का तीसरा/चौथा वर्ण या य, र, व = उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्); पहला वर्ण + न/म = उसी वर्ग का पाँचवाँ (नासिक्य) वर्ण; त् + च/ज/ल = च्च/ज्ज/ल्ल; म् + क से म तक का कोई वर्ण = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण।
विसर्ग संधि
विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में परिवर्तन होता है: अः + घोष व्यंजन = ओ; इः/उः + स्वर या घोष व्यंजन = र्; ः + च/छ = श्; ः + त/थ = स्; इः/उः + क/प/फ = ष्; इः/उः + र = विसर्ग का लोप और इ/उ दीर्घ (ई/ऊ) हो जाता है (निः + रस = नीरस) — यह इः/उः + घोष = र् का अपवाद है; अः + र में ओ ही बनता है (मनः + रथ = मनोरथ)।
आधार: मानक विद्यालयी हिंदी व्याकरण (NCERT एवं यूपी बोर्ड कक्षा 9–10 हिंदी व्याकरण): संधि और समास · कामताप्रसाद गुरु, हिंदी व्याकरण (मानक संदर्भ व्याकरण)